बागपत: देश की राजधानी दिल्ली में किसानों के आंदोलन को शनिवार को 93 दिन हो गए। किसान कृषि कानून को वापस लेने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग को लेकर दिल्ली के सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर जुटे हुए हैं। किसानों के मुद्दे पर विपक्ष भी सरकार को जमकर घेरने का काम कर रही है, लेकिन मोदी सरकार इसे किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम बता रही है। इन सब के बीच एक बार फिर किसान नेता राकेश टिकैत ने कृषि कानून को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। किसान नेता देशभर में किसानों को एकजुट करने के लिए किसान महापंचायत कर रहे हैं।

बागपत में बोलते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि मोदी सरकार के हाथ में कुछ नहीं है, व्यापारी उन्हें जो कह रहे हैं सरकार वही कर रही है। सरकार ने कानून लागू करने से पहले गोदाम बनवा दिए, बाद में जाकर तीनों कानून बनाए हैं। वो दिन दूर नहीं जब जनता इन गोदामों को तोड़ देगी। उन्होंने बताया कि चौधरी चरण सिंह मंडी कानून लेकर आये थे, जिसको सर छोटूराम राम ने पंजाब में लागू करवाया। जिसकी वजह से आज पंजाब के किसानों की फसल एमएसपी पर खरीदी जाती है।

वहीं किसान आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि जिस दिन ये आंदोलन कमजोर हुआ, समझो उस दिन किसानों की कमर टूट जाएगी। ये आंदोलन 70 साल से घाटे की खेती कर रहे किसानों के हक की लड़ाई है। किसान आज अपनी फसल का दाम नहीं ले पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर आज ये किसानों का आंदोलन नहीं होता तो सरकार ने गन्ने की कीमत बढ़ाने की जगह घटा देती।

44380cookie-checkराकेश टिकैत का दावा- मोदी सरकार के हाथ में कुछ नहीं, व्यापारियों के इशारे पर हो रहा काम |

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